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आखिर आज भी दलित समृद्ध क्यो नही हो सकें इसका कारण क्या है?

                                      आखिर दलित आज भी समृद्ध नही है ऐसा क्यो?
 जबकि देश के संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान में दलित समुदायों को आगे आकर शिक्षा के साथ नॉकरी में दाखिल होने व पदोन्नति तक कि सुविधा मुहैया कराई थी। परन्तु आज भी दलित समुदाय के लोग पिछड़े व गरीब क्यो है इसका कारण क्या है आइए प्रकाश डाले।



गौरतलब है कि देश के हर राज्य में दलितों में आने वाली जातिया अलग-अलग है जिससे कई राज्य में दलित वर्ग को सामान्य व पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल होना पड़ता है तथा उनके बच्चो के लिए शिक्षा महंगी पड़ती है जिसके कारण बोहोत से परिवार अपने बच्चों को शिक्षा देने में असमर्थ हो जाते है। जहां पर ये व्यवस्था उपलब्ध है अर्थात जिन राज्यो में दलितों को सरकार द्वारा जो सुविधा मिलती है वो उन्हें मिलती है लेकिन आप ध्यान दे सुविधा मिलने का मतलब ये है कि उन्हें वो मांग करनी होगी आवेदन देना होगा तब स्वीकृति या आगे की जो सुविधाएं है वो उन्हें मिलेंगी ।
1) अब प्रश्न ये है कि जिन परिवार के सदस्यों ने कभी एक कागज नही उठाई उन्हें क्या पता कि सरकार ने क्या योजना निकाली है किस योजना से क्या लाभ है क्योकि जो गरीब उन्हें यहाँ समाचार सुनने के भी कोई साधन नहीं होते जिससे कि उन्हें किसी भी योजना के बारे में पता हो।। तो जब वो आवेदन देंगे नही तो फिर उन्हें लाभ मिलेगा कैसे जिसके कारण वो आज भी गरीब है।
2) सरकार की योजनाओं में घोटाला - इससे हम ये समझने की कोशिस करे कि जिस प्रकार सरकार की हर एक योजना में अधिकारियों द्वारा जो गबन किया जाता है जिसके कारण भी लोग उस योजना का लाभ नही उठा पाते है
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3) जो लोग दलितों की राजनीति करते है दरअसल वो वाकई में सिर्फ राजनीति करते है क्योकि हमे ज्ञात है कि देश के हर राज्य के दलित समुदाय से जुड़े किसी न किसी व्यक्ति को अध्यक्ष बनाकर या उनका नेतृत्व करने के लिए चुना गया है जिससे वो व्यक्ति उनके अधिकार के लिए लड़े लेकिन देश के आज़ादी से आज तक जो भी इनका नेतृत्व किया है वो कभी भी समुदायों को समृद्ध बना न सका क्योकि उसने लोगो को झूठ बोलकर अपने राजनीति के लिए हरवाही करवाई और फिर उन्हें अपने आगे पीछे घूमने वाले बनाकर छोड़ दिया।।
4) अब बात करते है उन लोगो की जो सरकार की योजना का लाभ व आरक्षण का लाभ लेकर नॉकरी में भर्ती हो जाते है वो लोग जब धीरे धीरे  समृद्ध हो जाते है तो वो कभी भी आरक्षण का त्याग नही करते अपितु आरक्षण का परिभाषा बदलने की चेष्टा करने लगते है।। आरक्षण गरीब लोगों के लिए बनाई गई नियम व कानून है लेकिन कुछ लोग इसे ऐसा समझ बैठे है जैसे ये उनके पिताजी की खानदानी जायदाद हो।।
निष्कर्ष में हम ये पहुँच पाए कि सरकार की योजना हो दलितों के नेतृत्व कर्ता हो ये स्वयं के लाभ के लिए सबसे पहले सोचते है।
जिसके कारण दलित समुदाय आज भी गरीबी है और उनके बच्चे गरीबी झेल रहे है। क्या सरकार को कुछ नए तरीके से उन तक लाभ पहुचाने का कार्य नही करना चाहिए क्या सरकार उनका भला नही चाहती ?

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