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भारतीय झंडे का विवाद समझे क्या है - रुपेश रजक

आज हम बात करेंगे झंडा भी बात पर आखिर भारत में यह झंडा विवाद है क्या ? और किस कारण से यह विवाद बना किस बात को लेकर झंडा का विवाद होता है किन किन नियमों को पालन करना पड़ता है यह सारी बातें आज हम बताएंगे और आप सभी से अनुरोध भी करेंगे कि इसे शेयर करें ताकि और अन्य भी लोगों को जानकारी मिली कि भारत देश के झंडे हैं उसके प्रति हमारी क्या कर्तव्य होनी चाहिए।

तो जैसे हमारी
पुरानी ध्वज संहिता है जिसमें प्राचीन प्रावधानों की एक लंबी सूची थी जिसमें झंडा फहराने का अधिकार को जी व्यक्तियों का विशेषाधिकार था हो सकता है यह मंत्री होंगे नेता होंगे या बड़े-बड़े उद्योगपति लेकिन वर्ष 2002 में जिंदल समूह के उपाध्यक्ष नवीन जिंदल ने झंडा फहराने के अपने अधिकार पर निबंध को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। 
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश की तिरंगा फहराने मौलिक अधिकार है तथा इसके बाद में ध्वज संहिता के उदारीकरण के प्रश्न के परीक्षण हेतु समिति गठित करने के सर्वोच्च न्यायालय की अनुशंसा के पश्चात सरकार ने समिति गठित की समिति की अनुशंसा के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तिरंगा फहराने से संबंधित अनावश्यक कठोर नियमों में छूट देने का निर्णय लिया है जो कि कुछ इस प्रकार है। 
  • कोई भी व्यक्ति केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही झंडा पारा सकता है। 
  • झंडे की चौड़ाई व लंबाई का अनुपात 2:3 होना चाहिए। 
  • इसे वस्त्र गद्दे या नैपकिन पर प्रिंट नहीं करना चाहिए। 
  • एसटी के कफन के रूप में इसका प्रयोग ना करें। 
  • वाहनों पर झंडा ना लपेटे । 
  • इसका ऊपरी भाग नीचे करके ना पा रहा है वह इसे जमीन से इस पर नहीं करना चाहिए। 
  • संयुक्त राष्ट्र व अन्य देशों के झंडों को छोड़कर इसे सभी झंडों से ऊंचाहार आना चाहिए। 
  • क्षतिग्रस्त संडे को न फहराए। 
  • संशोधित संहिता 26 जनवरी 2003 से लागू की गई। 
तो जैसा की आप सभी समझ गए होंगे कि झंडा फहराना एक मामूली खेल नहीं है जैसा कि हम सभी भारतीय समझते हैं क्योंकि आपने देखा होगा कि किस प्रकार झंडे का बार-बार अपमान होता है किसी दूसरे धर्म के द्वारा या किसी झगड़ों में भी या प्रदर्शनों के दौरान झंडे का अपमान हो ही जाता है दूसरा एक और बात है कि आपने इन जितने भी लाइन में पड़ा होगा इसमें झंडे के अपमान को लेकर ही सारी बातें कही है कि हमारे भारत के झंडे का अपमान किसी भी हाल में ना किया जा सके जिससे कि हमारे देश की संप्रभुता को कोई आहट हो। 


हम सभी भारतीयों को अपने देश के झंडे को अपने दिल में बसा कर रखना चाहिए हमें ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश के झंडे का अपमान हो। क्योंकि देश का अपमान आपका अपमान भी होगा इसलिए इन सभी लाइनों को अच्छे तरीके से समझे और इसके ऊपर अपना विचार करें कि हमें खेल-खेल में कोई भी कृत्य नहीं करना चाहिए क्योंकि यह हमारे अभिमान का विषय है हमारे गौरव का विषय है। जिसका ख्याल हम सभी भारतीयों को ही रखना है क्योंकि इसका ख्याल हम रखेंगे तो ही। कोई अन्य देश और कोई अन्य धर्म के लोग रखेंगे क्योंकि मैं धर्म की बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हमने देखा है कि तिरंगे का अपमान कुछ देश के लोग किया करते हैं। जो भारत में ही रहते हैं इसीलिए हमें यह धर्म शब्द छोड़ना पड़ रहा है नहीं तो हमें कोई भी जरूरत नहीं पड़ती कि हम धर्म का नाम ले क्योंकि देश धर्म से ऊपर होता है और उस देश में धर्म की कोई भी स्थान नहीं होती जो भी जिस भी देश में रहता है उस देश का वासी होता है। उसका एक ही धर्म होता है देशवासी होना तो आप सभी से अनुरोध है। कि इस बात को थोड़ा ध्यान से समझे पर इस पर अमल करें और लोगों को प्रेरित करें कि वह भी ऐसा ना करें क्योंकि उनकी गलती आप का भी अपमान कर रही है आपकी भी इज्जत को तार-तार कर रही है लेख को शेयर जरूर करें ताकि और लोग यह संदेश पहुंच सकें।
धन्यवाद 
जय हिंद जय भारत

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