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क्या भारत मे सबसे जटिल समस्या है जनसंख्या ? आइये जाने ऐसा क्यो

जनसंख्या नियंत्रण से गरीबी , बेरोजगारी एवं अशिक्षा मुक्त भारत

जैसा की भारत देश अनुमानित 130 करोड़ जनता का परिवार है जिसमे सबसे अधिक युवा वर्ग की है जो की भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है की देश को इस बदहाली से निकालने मे युवाओ का बोहोत बड़ा योगदान दे सकता है क्योकि भारत देश गरीब देशो की श्रेणी मे आता है जो की हमारे समझ से परे है क्योकि हम भारत को ऐसा बिलकुल नही देख पाते है हालांकि हम इस बात से सहमत है की समानता बराबर की स्थिति मे नही है क्योकि अमीर व्यक्ति और गरीब व्यक्ति के बीच का अंतर काफी गहरा है । 

भारत की जनसंख्या पर आधारित
Biggest problem in INDIA


भारत मे गरीबी , भूख और बेरोजगारी राष्ट्रव्यापी समस्या है और ये तीनों ही समस्याए किसी भी देश के लिए अपमान एवं सामाजिक व राजनैतिक व्यवस्था की असफलता की सूचक है । आज भारत मे यदि 25 करोड़ लोगों की प्रतिदिन की औसत आमदनी रुपये है और दूसरी ओर 25 करोड़ लोग प्रतिदिन 5 करोड़ रूपये कमाते हैं । इसका सीधा - सीधा अर्थ है- एक तो हमारी आर्थिक नीतिया सामंतवादी है और दूसरा हमारे यहाँ भूमि , अन्न , भवन , काम एवं संसाधन इत्यादि कम होते जा रहे हैं और जनसंख्या प्रतिदिन बेहिसाब तेज गति के साथ बढ़ती जा रही है और यदि वक्त रहते हमने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया तो देश की स्थिति बहुत ही खराब व अनियंत्रित हो जाएगी ,भूख , बेरोजगारी एवं गरीबी से पीड़ित समाज मे हेल्थ , वैल्थ व एजुकेशन का असंतुलन तो होगा ही , साथ ही हिंसा , अपराध एवं सामाजिक संघर्ष के ऐसे युग की शुरुवात हो जाएगी , जिसमे पूरा देश धू - धू कर के जल जाएगा और देश के लिए बहोत खतरनाक सिद्ध होगा ।
सामंतवादी , मार्क्सवादी , लेनिनवादी , असामाजिक व्यवस्था , पूंजीवादी एवं साम्यवाद के स्थान पर हमे एक संतुलित एवं पुरुषार्थ आधारित आदर्श विकसवाद के दर्शन को अपनाना होगा । प्रत्येक गाव ,व्यक्ति , समाज व राष्ट्र आत्मनिर्भर , समर्थ , स्वावलम्बी व सुखी हो , ऐसा समाजवाद को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है । कम्युनिस्ट सोच के अनुसार यदि हम सम्पूर्ण देश की संपत्ति सब मे बराबर बाँट भी दे तो कुछ दिनों मे ही पुनः भूख , बैरोजगारी , बीमारी व गरीबी बढ़ेगी ही क्योकि इन समस्यायों का मूल कारण अनियंत्रित जनसंख्या है एवं जिसका समाधान है - जनसंख्या नियंत्रण ।



जनसंख्या नियंत्रण से ही भूख , भय , बैरोजगारी ,अशिक्षा , बीमारी  एवं हिंसा मुक्त , सभ्य , स्वस्थ , सुखी एवं वैभवशाली भारत का निर्माण संभव है क्योकि बिना डिमांड के प्रॉडक्शन की जैसे कोई कीमत नही होती है वैसे ही बिना बदलाव का प्रयास किए बदलाव नही होता है - आइये सरलता मे समझे।
जीतने लोग जन्म ले चुके है इनके लिए भी हमारे पास संसाधन व रोजगार नहीं है और बावजूद इसके हम अनावश्यक बच्चे पैदा किए जा रहे हैं । ऐसे मे देश की बदहाली को कोई रोक नहीं सकता , इसके लिए दो उपाय हैं या तो देश के लोग अपने विवेक से ही कम बच्चे पैदा करें और अपने विवेक से काम न लेने पर अज्ञान मे अधिक बच्चे पैदा करने पर चीन जैसे कठिन नियम कानून देश मे बनाए और उसे कठोर व प्रभावी रूप से लोगो को पालन करने पर ज़ोर दे और सरकार के कार्यो मे अहम बदलाव करके रोजगार सृजन मे बढ़ोत्तरी करने के प्रयास किए जाए जो भारत के आजादी के बाद से ही नही की गयी है तभी हम एक समृद्ध एवं शक्तिशाली भारत बना सकते हैं और देश से गरीबी , बैरोजगारी , अशिक्षा एवं भूखमरी जैसे सबसे जटिल समस्या को मिटा सकते है ।
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